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!... खुद ही साड़ी उठा के आपके पास आ जाती....!!

 !!... खुद ही साड़ी उठा के आपके पास आ जाती....!!




 पायल और बहु को छत पर ले जाना चाहते है. उर्मिला बाबूजी के चहरे पर वो बेचैनी पढ़ लेती है. वो पायल के सर पर हाथ रख कर कहती है.

उर्मिला : पायल...!! बालों में कब से तेल नहीं लगाया तुने? देख तो कितने रूखे-सूखे हो गए है.

पायल : (समझ नहीं पाती) कल ही तो शैम्पू लगाया था भाभी....

उर्मिला : (पायल को आँख दिखाते हुए) शैम्पू से क्या होता है. तेल लगाया कर...(थोडा जोर से आँखे बड़ी कर के) .."तेल".....

पायल : (उर्मिला का इशारा समझ जाती है) वो..हाँ..हाँ भाभी...तेल लगाना तो जरुरी है.

उर्मिला

!... खुद ही साड़ी उठा के आपके पास आ जाती....!!


: तो चल...छत पर चलते है...वहां मैं तेरे बालों में तेल लगा दूंगी...

पायल : हाँ चलिए भाभी....

उमा : दोनों छाओ मैं बैठना...धुप में बैठोगे तो हालत खराब हो जाएगी...

पायल : जी मम्मी....

उर्मिला और पायल उठ कर सीढ़ियों से छत पर जाने लगते है. उर्मिला हाथ में तेल की शीशी ले कर है. पायल बहुत खुश हो रही है. उर्मिला उसे देख के कहती है.

उर्मिला : तू खुश तो ऐसे हो रही है जैसे मैं तेरे सर के नहीं, बूर के बालों में तेल लगाने वाली हूँ ताकि तू बाबूजी का मोटा लंड ले सके...

पायल : (मस्ती में) तो लगा दो ना भाभी....

उर्मिला : (धीरे से पायल के कंधे पर चपत लगाते हुए) चुप कर बदमाश.... अच्छा सुन..मैंने आज बाबूजी को परेशान करने के लिए कुछ सोचा है.

पायल : लेकिन बाबूजी को परेशान क्यूँ करना है?

उर्मिला : अरे ऐसे ही मजाक करना है बाबूजी के साथ. और क्यूँ ना करें? घर की दो-दो जवान बूरें ऐसे ही दे दें क्या?

दोनों हँसते हुए छत पर जाने लगती है. उर्मिला पायल को सारी बात समझाने लगती है.

दोनों के जाते ही बाबूजी का लंड भी मचलने लगा है. अब उन से निचे बैठा नहीं जा रहा. वो उमा से कहते है.

राज : उमा ... मैं भी जरा छत से टहल कर आता हूँ...बैठे-बैठे कमर पकड़ ली है...

उमा : हाँ जी..आप भी जाईये....मैं भी जरा कमरें में जा कर लेटती हूँ. कमबख्त बिजली ने कल रात ठीक से सोने भी नहीं दिया. सोनू भी फिर से जा कर सो गया है...

राज : हाँ उमा...तुम जरा अराम कर लो...

उमा के जाते ही रमेश तेज़ क़दमों से ऊपर छत पर जाने लगता है. ऊपर जाते ही वो देखता है की छत पर दोनों अमरुद की एक बड़ी सी टहनी की छाओं में बैठे है. पायल अपने घुटनों को मोड़ के बैठी है और उर्मिला ठीक उसके पीछे बैठ कर उसके बालों में तेल लगा रही है. राज चेहरे पर मुस्कान लिए धीरे-धीरे टहलते हुए उसके पास जाते है. बाबूजी को आता देख उर्मिला झट से खड़ी हो जाती है और बाबूजी के पैर पढ़ने लगती है.

राज : अरे उर्मिला...आज कितना पैर पढ़ेगी मेरे बेटी...

उर्मिला : (मुस्कुराते हुए खड़ी होती है) पैर पढ़ना तो एक बहाना है बाबूजी, असल में तो आपको कुछ दिखाना है...(कहते हुए उर्मिला अपने बड़े-बड़े दूध ब्लाउज के अन्दर से उठा देती है)

राज : (उसके उभरे हुए दूध देख कर) ये..ये...बहु....तुमने अन्दर ब्रा नहीं पहनी ?

उर्मिला : हाँ बाबूजी...आपने कहा था ना की एक बार दिखा देना...

राज : (ख़ुशी से) जुग-जुग जियो बहुरानी....

राज उर्मिला के बड़े-बड़े दूध आँखे फाड़ फाड़ के देख रहा है. ब्रा ना पहनने पर उर्मिला के निप्प्लेस खड़े हो कर ब्लाउज के ऊपर से साफ़ दिख रहे है. उर्मिला की तेज़ साँसों के साथ उसके दूध ऊपर निचे हो रहे है और उसके साथ राज की नज़रें भी. ये तमाशा पायल गौर से देख रही है. पापा और भाभी की ये मस्ती उसे बहुत मजा दे रही है. कुछ क्षण बाद पायल कहती है.

पायल : भाभी...पापा को अच्छे से दिखा दिया हो तो अब मेरे बालों में तेल भी लगा दो...

पायल की बात पर उर्मिला हँसते हुए उसके पीछे आ कर बैठ जाती है. रमेश भी मुस्कुराते हुए पायल के ठीक सामने कुछ दूरी पर बैठ जाता है. वहां से वो उसकी टांगो के बीच से पैन्टी देखने लगता है. पायल भी समझ जाती है की पापा की नज़र कहाँ है.

राज : पायल बिटिया...अराम से बैठो...टाँगे अच्छे से खोल कर..ऐसे सिमट के क्यूँ बैठी है...?

पायल : (मुहँ बनाते हुए) नहीं पापा...मैं टाँगे नहीं खोलूंगी....

राज : (अचरच के साथ) क्यूँ बेटी? क्या हुआ?

उर्मिला : बाबूजी....पायल का कहना है की खजाने तक पहुंचना है तो आपको मेहनत करनी पड़ेगी....

राज : (हँसते हुए) अरे बहु...बेटी के खजाने के लिए तो बाप कुछ भी कर सकता है. बोलो क्या करना होगा...

पायल : पापा...मैं और भाभी आपसे कुछ सवाल करेंगे और आपको उनका सही जवाब देना होगा...अगर आप सभी सवालों के सही जवाब दोगे तो आज आपको मेरे और भाभी के खजाने के दर्शन हो जायेगे.

राज इस बात पर अपने ओठों पर जीभ फेरने लगता है. आज बेटी और बहु के बूर देखने को मिलेगी ये सोच कर वो ख़ुशी से पागल हो जाते है.

राज : हाँ हाँ पायल...कोई बात नहीं...जितने सवाल पूछने है पूछ लो...मैं तैयार हूँ.

पायल और उर्मिला एक दुसरे की तरफ देख कर एक बार जोर से हँस देती है. राज कुछ समझ नहीं पाता. फिर उर्मिला बाबूजी से सवाल पूछती है.

उर्मिला : अच्छा बाबूजी...आपका पहला सवाल... "आजू-बाजू बाल, बीच में दरार...बोलो क्या?"....

उर्मिला की बात सुन कर राज के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. वो उर्मिला से कहते है...

राज : ये तो बड़ा ही आसान सा सवाल है बहूँ....

उर्मिला पीछे से पायल के घुटनों पर हाथ रख के उसके पैरों को खोल देती है और बाबूजी के सामने बूर पे कसी हुई पैन्टी दिखाते हुए कहती है.

उर्मिला : तो बोलिए ना बाबूजी...जवाब दीजिये...

राज: (मुस्कुराते हुए) जवाब है - "बूर"..

राज की बात पर उर्मिला और पायल जोर जोर से हँसने लगती है. राज को कुछ समझ नहीं आता की आखिर ये हो क्या रहा है. वो हक्का-बक्का दोनों को हँसते हुए देख रहा है.

पायल : छी पापा...आप कितने गंदे हो....भाभी के सवाल का जवाब है...(उर्मिला के सर की तरफ इशारा करते हुए) सर की "मांग"...

राज : (चुप चाप थूक गुटकते हुए) अ..अ...अच्छा...ठीक है...दूसरा सवाल क्या है?

पायल : आपका दूसरा सवाल है...."जो आधा जाए तो दर्द होए...पूरा जाए तो मज़ा आये..बोलो क्या ?"

पायल बाबूजी की टांगो के बीच देखने लगती है. बाबूजी भी लंड को एक झटका देते हुए कहते है...

राज : जवाब है, - "लंड"

फिर से पायल और उर्मिला जोर जोर से हँसने लगती है. राज का दिमाग फिर से घूम जाता है. वो समझ नहीं पता की ये हो क्या रहा है.

राज : अरे...!! दोनों हँस क्यूँ रहे हो?

पायल : (हँसते हुए) पापा...कितनी गन्दी सोच है आपकी. सवाल का सही जवाब है... (उर्मिला के हाथों की तरफ इशारा करते हुए) .."कंगन"...

राज अब ये सब और नहीं झेल सकता था. वो छत पर जिस काम से आया था वो जल्दी से शुरू करना चाहता था.

राज : अरे अब बस भी करो. छोड़ो ये सब सवाल-जवाब...पायल बिटिया...जरा मेरे पास आना...

पायल : नहीं पापा...मैंने पहले ही बता दिया था. जवाब गलत होगे तो कुछ नहीं मिलेगा.

राज : मेरी प्यारी बिटिया रानी...ऐसी भी क्या जिद है...आजा...देख पापा तुझे बुला रहे है.

पायल : (नखरे से) नहीं मतलब नहीं......!!

राज : अरे बहु...तुम ही इसे समझाओ ना...देखो तो कैसे जिद कर रही है...

उर्मिला : अब बाप-बेटी के बीच मैं क्या बोलूं बाबूजी...वैसे पायल ने ठीक ही कहा है. जवाब तो आपने गलत ही दिए है ना....

राज का मुहँ उतर जाता है. वो समझ जाता है की अब उनकी दाल नहीं गलेगी. रमेश धीरे से खड़ा होता है और मुड़ के छत के दरवाज़े की तरफ जाने लगता है. तभी राज को पायल और उर्मिला की हंसी सुनाई देती है. वो मुड़ के देखते है. तभी उर्मिला कहती है.

उर्मिला : नहीं नहीं बाबूजी...आपसे से हम कुछ नहीं कह रहे है...

राज फिर से उदास मुहँ से जाने लगते है. वो मन में सोचते है, "आज का दिन तो बर्बाद हो गया. सोच था मेरी बेटी और बहु आज कुछ मज़ा देगी. सब बेकार हो गया". तभी राज को पीछे से धीमी आवाज़ आती है...

उर्मिला : बाबूजी....!!

राज पीछे मुड़ के देखते है तो उनकी आँखे बड़ी हो जाती है. सामने अमरुद की डाल की छाओं में बैठी उर्मिला पायल की टॉप उठा के उसके बड़े-बड़े दूध दिखा रही है. पायल भाभी की गोद में बैठी मुस्कुरा रही है और उर्मिला उसके दूध दबा कर बाबूजी को दिखा रही है. राज एक नज़र पड़ोस की छतों पर डालता है और झट से छत का दरवाज़ा बंद कर देते है. फिर रमेश दौड़ा कर पायल के पास बैठ जाते है.

राज : ऐसे तड़पाएगी अपने पापा को पायल?

पायल : नहीं पापा...हम तो बस आपके साथ मज़ाक कर रहे थे.

उर्मिला : बाबूजी...आप पायल से इस बात का बदला अच्छे से लीजिये....

राज : हाँ बहु....अब तो बदला लेना ही पड़ेगा...

ये कहते हुए रमेश पायल पर झुक जाते है और उसके दूध को जोर से चूसने लगते है. पायल मस्ती में दोनों हाथो को पीछे कर के उर्मिला को पकड़ लेती है और उसकी आँखे बंद हो जाती है. मुहँ से सिसकियाँ निकलने लगती है.

पायल : सीईईईइ.....पापा....ओह...!!

राज पायल के दूध को दबा दबा के चूसने लगते है. कभी दायाँ दूध तो कभी बायाँ. बारी-बारी दोनों दूध रमेश के मुहँ में फिसल के घुस जाते है और राज  उन्हें दबा दबा के पीने लगते है. उर्मिला पायल के सर पर हाथ फेरते हुए उसे मस्ती में पापा से अपने दूध चुसवाते हुए देख रही है.

उर्मिला : हाँ बाबूजी...अच्छे से चूसिये...पायल कह रही थी की जब उसका दूध आने लगेगा तो वो सबसे पहले अपने पापा को ही पिलाएगी...

उर्मिला की बात सुन के रमेश दूध चुसना बंद कर के पायल को देखने लगते है. वो पायल की आँखों में देखते हुए कहते है...

राज : बहु सच कह रही है पायल ?

पायल पापा की आँखों में देखते हुए अपने ओठ काट लेती है और धीरे से सर हिला कर हामी भर देती है. पायल की हाँ समझते ही रमेश के अन्दर जोश भर जाता है. वो एक बार पायल के दूध को गौर से देखते है और फिर किसी भूके भेड़िये की तरह उन पर टूट पड़ते है. इस बार रमेश पूरे जोश में पायल के दूध दबा-दबा के पीने लगते है. पायल की हालत खराब हो जाती है. उर्मिला पायल की टॉप को उसके बगल से थोडा ऊपर कर देती है. टॉप में बहुत देर से बंद बालोवाली बगल से पसीने की गंध रमेश की नाक में जाती है तो वो दूध छोड़कर अपनी नाक पायल की बगल में घुसा देते है और जोर से साँसे ले कर गंद सूंघ लेते है. फिर वैसे ही वो दुसरे बगल की गंद सूंघते है. दूध को दबा दबे के पीते हुए रमेश बीच बीच में अब पायल के बगलों की गंध भी सूंघ रहे है. पायल भी पूरी मस्ती में आ चुकी है. पापा को पूरे जोश में देख पायल कहती है.

पायल : पापा...देखिये ना, भाभी के भी कितने बड़े है...

पायल की बात सुन कर राज  उर्मिला के दूध को घुर के देखने लगते है. बाबूजी की ऐसी नज़र देख कर उर्मिला के पसीने छूट जाते है. पायल जब ये देखती है तो वो उर्मिला के ब्लाउज के हुक खोलने लगती है. कुछ ही पल में उर्मिला के बड़े-बड़े दूध उच्छल के बाबूजी के सामने आ जाते है.

राज  : सच में पायल...तेरी भाभी के तो बहुत बड़े है. बहु...जब मैंने तेरी सुहागरात में दरवाज़े पर से तेरी चिल्लाने की आवाज़े सुनी थी तब मैंने बाथरूम में जा कर ३ बार अपने लंड को मुठिया के पानी निकाला था. उस रात मैंने धोती में हाथ डाले रात भर तुझे याद किया था.

उर्मिला : (तेज़ साँसों के साथ) तो एक बार बोल देते ना बाबूजी...मैं खुद ही अपनी साड़ी उठा के आपके पास आ जाती...

राज  ओह बहु...मुझे पहले पता होता की मेरी बहु भी अपनी साड़ी उठाये तैयार है तो मैं कब का बोल देता...

उर्मिला : अब जब आपका दिल करे बोल दीजियेगा बाबूजी... मैं अपनी साड़ी उठाये दौड़ी चली आउंगी...

राज : ओह बहु... (राज ये कह कर उर्मिला के दूध पर टूट पड़ता है)

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