मेले के मेले के बहाने 1 1 में अब तक आपने पढ़ा था कि मैं अपनी सहेली सुषमा के साथ मेरे में घूमने जाने का प्लान बना रही थी. अब आगे हिंदी कहानी: शाम 6 बजते बजते सभी नए कपड़े वगैरह पहन तैयार होने लगे. मेरे भईया भाभी साथ जाने वाले थे. मेरा भतीजा अपने दोस्तों के साथ. भाभी को मैंने बता दिया कि मेले के समय रात भर मैं सुषमा के यहां ही रहूंगी. शाम 7 बजते बजते सब मेले के लिए निकल गए. मैं, भईया भाभी और भतीजी, सुषमा के घर होते हुए उसको साथ ले लिया और मेले में पहुंच गए. चारों तरफ शोर शराबा था, गजब की रौनक थी वहां. रात क्या होने वाला है हम उससे अज्ञात थे. बस हम सब मेले का लुत्फ़ उठाने में व्यस्त हो गए. घूमते हुए हम सब अलग अलग हो गए. मेरे भईया भाभी और भतीजी एक दुकान के पास रूके. उन्होंने हमें बोला कि आगे बढ़ जाओ क्योंकि वो लोग मंदिर जाने वाले थे. वहीं सुषमा का भाई और उसकी पत्नी वहीं से मंदिर चले गए. मंदिर में रात भर भजन कीर्तन होता है तो अधिकांश लोग सुबह तक वहीं रह जाते हैं. मैं और सुषमा घूमती हुई खाते पीते इधर उधर होती रही. समय कैसे बीत गया पता ही नहीं चला. हम फिर मंदिर चले गई, वहां भजन सुनने ल...