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भाभी की कामवासना देवर के लौड़े से बुझी

 




भाभी की कामवासना देवर के लौड़े से बुझी

( Bhabhi ki Kahani)

वैभव चौधरी  भाभी की कहानी में पढ़ें कि मेरे भाई शराब पीते थे और भाभी को बच्चा नहीं हो रहा था. भाभी नेमुझे कई बार इशारा किया पर मुझे समझ नहीं आता था. तो मेरे दोस्त ने मुझे समझाया.


दोस्तो, मैं वैभव चौधरी!

मैं हरियाणा का जाट हूँ और जाटों के जैसा ही मेरा लंबा चौड़ा शरीर है.


आपको मैं अपनी प्यासी भाभी की चुदाई की कहानी सुना रहा हूँ.


मैं फौज में भर्ती होने के लिए कोशिश कर रहा था.

मेरे कुछ दोस्त भी फौज में भर्ती होने के लिए खेल के माध्यम से अपनी तैयारी कर रहे थे.


मैं कुश्ती लड़ने की प्रेक्टिस कर रहा था.

मेरा कद भी अच्छा खासा था और पहलवानी करने के कारण मैं किसी सांड से कम नहीं लगता हूँ.


मेरी उम्र भी तब 22 साल की थी तो मुझे देख कर लड़कियों के अलावा गांव की भाभियां भी आहें भरती थीं.


मैं इस बात से नावाकिफ रहता था और अपनी ही मस्ती में मगन रहता था.


मेरी दिनचर्या भी कुछ ऐसी थी कि सुबह सुबह घर के पीछे बने खुले आँगन में लंगोट पहन कर मुगदर घुमाता, दंड पेलता और उठक-बैठक लगाता.


उसके बाद मेरी मां या भाभी भैंस का दूध काढ़ कर ले आती थीं, तो कच्चा ही एक लीटर दूध गटक लेता था.


फिर घर से निकल कर अखाड़े चला जाता था, तो उधर कुश्ती की प्रेक्टिस होती और दस बजते बजते गांव के तालाब पर हम सारे पहलवान नहाने चले जाते.


उधर एक तरफ गांव की भाभियां कपड़े आदि धोने को बैठी रहती थीं तो उनकी तरफ से हम लड़कों के ऊपर छींटाकशी की जाती थी.

जिसका हम लोग बुरा नहीं मानते थे.


मुझे समझ ही नहीं आता था कि ये लोग खास तौर से मेरा नाम लेकर ही अधिकांश कमेंट्स क्यों करती हैं.


इस बात को लेकर एक दिन मैंने अपने दोस्त जोगेंदर से बात की.

उसने बताया- अबे तू क्या एकदम चूतिया है!


मैंने कहा- क्यों भाई इसमें चूतिया वाली क्या बात है?

उसने हंस कर कहा- वो सब तेरी बॉडी पर फिदा हैं. इसीलिए तो तेरे ऊपर कमेंट्स करती हैं.


मैं अब तक समझता था कि इनकी तो शादियां हो चुकी हैं और ये सब अपने पति के साथ ही मस्त रहती होंगी.

मुझे सपने में भी गुमान नहीं था कि भाभियों को भी मेरे जैसे लड़कों को देख कर मजा आता होगा.


उस दिन जोगेंदर ने मुझे फोन में अन्तर्वासना साइट खोल कर दिखाई और मैं उधर हजारों की तादाद में सेक्स कहानी देख कर हैरान हो गया.


वस्तुतः उसी दिन मुझे सेक्स के बारे में सही से समझ आई थी.

फिर तो देसी भाभी चुदाई कहानी को पढ़ कर मुझे सब समझ में आने लगा कि मामला क्या है.


तब भी मैं अपनी पहलवानी में लगा रहा और अब तालाब पर भाभियों की छींटाकशी सुनकर मैं मुस्कुरा देता था.


उधर एक दिन सोहनी भाभी जो कि मेरे पड़ोस में रहती थीं, उन्होंने मुझे अकेला पाकर एक ऐसी बात कह दी कि मैं भौचक्का रह गया.


उन्होंने कहा- ऐसे सांड से शरीर का क्या फायदा कि तुझे कोई चाचा कहने वाला ही पैदा नहीं हो पा रहा है!

मैं उनकी बात को समझा नहीं!


मैंने सोहनी भाभी से पूछा- इससे मेरे सांड से शरीर का क्या मतलब हुआ भाभी?

वो हंस कर बोलीं- तू गंवार ही रहेगा.


मैंने उनसे तफ़सील से पूछना चाहा तो उन्होंने कह दिया- अपनी भाभी से ही पूछ लियो.

मैं अभी कुछ और पूछता कि सोहनी भाभी अपने कपड़े उठा कर चली गईं.


मैं असमंजस की स्थिति में सर खुजाता हुआ अपने घर आ गया. मुझे समझ ही नहीं आया कि भाभी प्रेगनंट होना चाहती हैं मुझसे!


घर पर देखा तो मां और पिताजी बड़े भैया को लेकर बड़बड़ कर रहे थे.

मेरे भाई को शराब पीने की लत लगी थी और वह सुबह से ही दारू पी लेते थे.


घर में भाभी अन्दर थीं और भैया नशे में टल्ली पड़े थे.

मैंने मां को चुप कराया तो वे किसी तरह से चुप हुईं.


फिर सब लोग अपने अपने काम पर लग गए.

पिता जी बाहर निकल गए और मां भाभी के साथ मिलकर गृहस्थी का काम समेटने लगीं.


मैं आँगन में फिर से नहाने लगा क्योंकि तालाब के पानी से नहाने के बाद घर में हैंडपंप के पानी से नहा कर ही मुझे चैन मिलता था.


नहा धोकर मैंने मां से खाना लगाने का कहा तो अहसास हुआ कि मां भाभी पर कुछ बड़बड़ा रही थीं.


उसमें मुझे कुछ बच्चा की बात समझ में आई.

तभी मुझे सोहनी भाभी की बात याद आ गई और मैंने कान खड़े करके उन दोनों की बात सुनना शुरू कर दी.


भाभी ज्यादा कुछ नहीं बोल रही थीं.

वे बस सुबक रही थीं और अपने भाग्य को कोस रही थीं.


कुछ देर बाद मां ने मुझे खाना परोसा और खाना खाकर मैं बरामदे में पड़ी चारपाई पर लेट गया.


कुछ देर बाद मां घर से बाहर चली गईं.

वे जाते जाते ये कह गई थीं कि आने में देर हो जाएगी.


उनके जाने के कुछ देर बाद भाभी मेरे करीब आईं और बैठ कर कहने लगीं- तुम्हें तो घर की किसी बात से कुछ लेना देना है ही नहीं?

मैंने उठकर बैठते हुए कहा- मैं समझा नहीं भाभी, आप क्या कह रही हैं?




भाभी ने कहा- मां जी को पोता चाहिए और तेरे भैया किस हाल में रहते हैं ये तुझे मालूम है!

मैंने कहा- हां भाभी, पर मैं उन्हें कैसे समझाऊं?


भाभी ने इसी तरह से गोल-मोल बातें करके मुझे समझाने की कोशिश की मगर मैं उस वक्त वास्तव में नहीं समझ सका था कि भाभी मुझसे चुदना कहती हैं.


वो तो हुआ यूं कि भाभी के जाने के बाद मैंने मोबाईल में अन्तर्वासना की सेक्स कहानी पढ़ी और अचानक से देवर भाभी सेक्स कहानी खुल गई जिसमें एक भाभी अपने देवर से चुद कर बच्चा पैदा करती है.


सेक्स कहानी पढ़ कर मेरा दिमाग मानो खुल सा गया था.

बस उसी दिन से मैं भाभी को सेक्स के नजरिए से देखने लगा.


मेरी छिपी नजरों को भाभी ने भी पढ़ना शुरू कर दिया था.

मगर घर में कोई ऐसा अवसर नहीं मिल रहा था, जब मैं भाभी से कुछ कह सकूँ.


हालांकि अभी खुल कर सेक्स के बारे में भाभी से कुछ भी कहना इसलिए भी ठीक नहीं लग रहा था क्योंकि मुझे नहीं पता था कि भाभी मुझसे चुदवाने के लिए राजी हैं या नहीं!


एक दिन की बात है, पिता जी और मां दूसरे गांव में किसी रिश्तेदारी में जाना था.


भाभी सुबह से भैंसों की जिम्मेदारी पूरी करके निकल गई थीं.

मुझे लगा कि वे तालाब पर गई होंगी.


मैं अखाड़े से निकल कर तालाब पर नहाने जाने को हुआ ही था कि पिताजी का फोन आ गया- हम दोनों निकल रहे हैं. तू खेत पर चला जा और जाकर देख ले कि मवेशी खेत में तो नहीं घुस गए हैं.


मैंने हामी भर दी और खेत पर आ गया.

वहां देखा तो कोई मवेशी नहीं थे.


हमारे खेत पर एक कमरा बना हुआ था. जिसमें हम लोग खेती के काम के बाद आराम करते थे.

मैंने सोचा कि चलो आ ही गए हैं, तो नहाने से पहले थोड़ी देर आराम ही कर लेता हूँ.


जैसे ही मैं कमरे में पहुंचा और देखा कि उधर मेरी भाभी सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाउज में ही लेटी सो रही हैं.

उन्हें ऐसे पड़ा देखकर मेरा लौड़ा फटने लगा.


मैंने पहले तो भाभी को धीमे से आवाज दी मगर उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं की.


अब मैंने उनके सामने बैठ कर उनके पेटीकोट को उठाकर देखा तो उन्होंने नीचे कुछ नहीं पहना था, वे बिल्कुल नंगी थीं.

उनकी झांटों वाली फूली चूत साफ़ नज़र आ रही थी.


मैंने हाथ अन्दर डाला और उनकी चूत पर जैसे ही हाथ रखा, तो उन्होंने एक मस्त सिसकारी ली और जाग गईं.

मैं घबरा गया.


मगर उन्होंने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए.

भाभी मेरे होंठों का रसपान करने लगीं.

मैं भी लग गया.


थोड़ी देर तक हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसते रहे.


उसके बाद उन्होंने ख़ुद को मुझसे अलग किया और कहा- अपने कपड़े उतारो और मुझे चोद दो.

मैंने कहा- पहले बूब्स तो चूसने दो!


ये कह कर भाभी का ब्लाउज उतार दिया.

उन्होंने ब्रा नहीं पहनी हुई थी, उनके नंगे बूब्स मेरे सामने थे.


मुझसे रहा नहीं गया मैंने उनके बूब्स दबाना शुरू कर दिए.

उनके मुँह से मादक सिसकारियां निकल रही थीं जो मुझे पागल कर रही थीं.


वे कह रही थीं- आह मसल डालो इन्हें और खूब चूस डालो … आह अपनी रखैल बना लो … आज मुझे रौंद डालो … मैं तुमसे कब से चुदवाना चाहती थी, पर तुम समझ ही नहीं रहे थे. आज मेरी तमन्ना पूरी कर दो मेरे राजा.


मुझे तो भाभी के दूध बड़ा पागल कर रहे थे. मुझे बड़े बड़े बूब्स बहुत पसंद हैं, उनकी बात ही कुछ अलग होती है.


अन्तर्वासना की सेक्स कहानी पढ़ने के बाद से तो मैं तालाब पर भी नहाती भाभियों के थन ही देखता रहता था.


मैं भाभी के बूब्स दबाने लगा.


फ़िर मैंने उनके एक मम्मे को मुँह में ले लिया और उनके कड़क निप्पल को चूसने लगा.

साथ ही मैं अपना दूसरा हाथ भाभी की चूत पर ले गया.


उनकी चूत पूरी गीली थी, ऐसा लग रहा था कि दरिया बह गया हो.


मैंने कहा- क्या हुआ भाभी, परनाला सा क्यों बह रहा है?

उन्होंने कहा कि मैं जिन्दगी में पहली इतनी झड़ी हूँ.


मैंने कहा- क्यों भैया नहीं चोदते?

उन्होंने कहा- तेरा भाई जब होश में रहेगा, तब चोदेगा ना. जब कभी चोदेगा भी तो डालते ही ठंडा पड़ जाता है. मुझे कुछ होता ही नहीं है.


अब मैं समझ गया था कि आज भाभी को चोदने में मजा आने वाला है.


तभी भाभी ने मुझसे कहा- कपड़े उतारो.

मैंने कहा- आप ही उतार दो.


उन्होंने मेरी शर्ट उतार दी.

उसके बाद पैंट मैंने उतार दी.

अब मैं सिर्फ अंडरवियर में था, उसमें मेरे लौड़े ने तंबू बनाया हुआ था.


भाभी ने अंडरवियर के ऊपर से मेरा लंड पकड़ लिया.


पहली बार किसी ने मेरा लंड पकड़ा था तो बहुत मजा आ रहा था.


फिर उन्होंने इलास्टिक को अपनी उंगलियों से नीचे किया तो मेरा 7.5 इंच लंबा और 2.5 मोटा लंड भाभी के सामने खड़ा था.


उन्होंने कहा- आह ये बहुत बड़ा है … ये तो मेरी चूत का भोसड़ा बना देगा.

मैंने कहा- आप आयी ही हो भोसड़ा बनवाने.


उन्होंने हंस कर कहा- चाहे आज मेरी चूत फट ही क्यों न जाए, पर आज मैं इससे चुदकर ही रहूँगी.

मैंने कहा- पहले इसे खुश तो करो.


वे मेरी बात समझ गईं और मेरे लंड के सुपारे को चूसने लगीं.


मैं तो अलग ही दुनिया में सैर करने लगा था.

आज पहली बार में ही कोई औरत मेरे लंड को चूसने लगी थी.


उन्होंने मेरा लंड ऐसा चूसा कि मुझसे रहा नहीं गया.

मैंने लंड चुसवाना छोड़ कर उनको सीधा लिटा दिया और उनके ऊपर चढ़ गया.


मैं भाभी की चूत पर अपना लंड रगड़ने लगा.

उनसे भी रहा नहीं गया और उन्होंने कहा कि अब डाल भी दो.


मैंने भाभी की बात मान ली और उनके होंठों पर अपने होंठ रख कर एक जोरदार धक्का लगा दिया.


भाभी की चूत गीली होने के कारण मेरा आधा लंड उसकी चूत में उतरता चला गया.


‘आई मर गई … आह साले ने फाड़ दी!’ भाभी की चीख निकल गई और उनकी आंखों से आंसू बहने लगे क्योंकि उनकी चूत बहुत टाइट थी.


दोस्तो, मुझे नहीं लगता कि किसी भी चूत ढीली हो सकती है क्योंकि वो बनी ही इसलिए होती है. वो चुदने के बाद फिर से जैसी की जैसी हो जाती होगी.


कुछ देर रुकने के बाद भाभी थोड़ी ठीक हुईं, तो मैंने दूसरा झटका मारा.

इस बार मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समा गया.


भाभी ने मुझे कसके पकड़ लिया जैसे कह रही हों कि समा जाओ मुझमें.

मैं भी समाना चाहता था.


अब मैंने झटके देने शुरू किए.

मेरे हर झटके के साथ भाभी की सिसकारियां मुझे मदहोश कर रही थीं.


भाभी बोल रही थीं- आह सी आह वैभव डार्लिंग चोदो मुझे … आज अलग दुनिया में पहुंचा दो.


मैं- भाभी फिर कैसा लगा मेरा लंड!

भाभी- आह आह आह आह … बहुत मजा आ रहा है … चोदते रहे, अपनी रंडी को चोद कर ठंड कर दो. आह वैभव तुमने मुझे अपने लौड़े का दीवाना बना लिया है.


मैंने भाभी को दस मिनट तक उसी पोजीशन में चोदा.

वे एक बार झड़ चुकी थीं.


फिर मैंने भाभी से पोजीशन बदलने को कहा.


अब मैं लेट गया और भाभी मेरे ऊपर चढ़ गईं.

उन्होंने अपनी चूत में मेरा लंड पकड़ कर डाला और उछलने लगीं.


वे चुदने के साथ साथ मेरे होंठों को अपने मुँह में भरने लगीं.

दोस्तो, यह मेरी मनभावन पोजीशन है.


भाभी के मुँह से फिर से सिसकारियां निकलने लगी थीं.

इसका मतलब वे फिर से गर्म हो गई थीं और झड़ने के करीब थीं.


वे लगातार बोल रही थीं- मेरी जान फाड़ दो मेरी चूत को!

उनके ये शब्द मेरे जोश को बढ़ा रहे थे.


लगातार आधा घंटा चोदने के बाद मेरा माल निकलने को हुआ.

मैंने भाभी से कहा- मैं निकलने वाला हूं.

वे बोलीं- अन्दर ही निकाल दो, मैं बहुत प्यासी हूं. तुम्हारा बच्चा अपनी कोख में लेना चाहती हूँ.


कुछ झटके देने के एक सिसकारी के साथ मेरा स्खलन हो गया और उनकी पूरी चूत भर गई.


भाभी ने मुझे अपनी बांहों में लपेट लिया और मेरे होंठों को लगातार 5 मिनट तक चूसती रहीं.


फिर मुझे अलग करती हुई भाभी बोलीं- आज तुमने मुझे वो ख़ुशी दी है, जिसे पाने के लिए मैं न जाने कबसे तड़प रही थी.


तब हम दोनों ने एक बार और चुदाई की और खेत पर बने हौद में ही नहाने लगे.


उसके बाद हम दोनों ने बहुत बार चुदाई की.

उसी पखवाड़े में भाभी की माहवारी रुक गई, भाभी प्रेगनंट हो गई थीं और मेरे लंड से उनको एक बच्चा होने वाला था.


समय के साथ भाभी की गोद भर गयी.


अगली बार कभी मौका मिला तो मैं भाभी के साथ साथ मुहल्ले की दूसरी भाभियों की चुदाई की कहानी भी आपको सुनाऊंगा.


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